Monday, January 18, 2010

आप किस अधिकार से कुश के प्रवक्ता बन रहे हैं -बच्चे को मुखर कीजिये! कब तक उसका मुंह दबाये रखियेगा

- अरविंद मिश्रा

मगर आप या कोई अन्य किस अधिकार से कुश के प्रवक्ता बन रहे हैं -क्या कुश खुद मुखर नही हैं -यदि कुश यही बात कह दें तो मैं उनसे क्षमा मांग लूंगा ! बिना शर्त ! मुझमें कोई सीनियरिटी भाव नहीं है -बच्चे को मुखर कीजिये ! कब तक उसका मुंह दबाये रखियेगा ! उचित है अब "बच्चा'ही बोले ! चच्चा लोग तनिक चुप रहें !

- अरविंद मिश्रा



सन्दर्भ: क्वचिदन्यतोअपि..........!
लिंक: http://mishraarvind.blogspot.com/2009/04/blog-post_08.html

8 comments:

Arvind Mishra said...

यह है ठांव कुठाँव घात.....आह !!
मैडम बहुत नृशंस हो सचमुच !!!!

Suman said...

nice

महेन्द्र मिश्र said...

nice

डा. अमर कुमार said...


किसी के प्रति स्नेह के अधिकार को भला कौन परिभाषित कर पाया है ?
और.. किसी के परस्पर स्नेह पर प्रश्नचिन्ह लगाने का अधिकार भला किसने पाया है ?

PD said...

ise kahte hain khod-khod kar nikalna.. bahut khoob, aise hi purane kabra khodte raho..

Ghost Buster said...

बड़ी स्टाइल से गंद मचाए हो भाई (या बहन) जो भी हो.

Anonymous said...

nice

Anonymous said...

Ise kahte hain chootiyaapa.