Thursday, January 14, 2010

एक दो नारियां हैं जो किसी पुरुष चिट्ठाकार का विरोध करें, तो बचे कई पुरुषों को एकदम मूत्रशंका होने लगती है


-शास्त्री जे सी फिलिप

हिन्दी चिट्ठाजगत में एक मजेदार बात यह है कि एक दो नारियां हैं जो किसी पुरुष चिट्ठाकार का विरोध करते हैं तो बचे कई पुरुषों को एकदम मूत्रशंका होने लगती है और वे तुरंत इन नारियों के चिट्ठों पर जाकर मथ्था टेक आते हैं कि “देवी, हम ने गलती नही की, अत: हमारे विरुद्ध कुछ न लिखना”

-शास्त्री जे सी फिलिप

संदर्भ: चिट्ठाचर्चा
लिंक: http://chitthacharcha.blogspot.com/2009/02/blog-post_16.html

2 comments:

संजय तिवारी ’संजू’ said...

ok, thanks.

ज्ञान said...

क्या कोई ज्ञानी बता सकता है कि चिट्ठाचर्चा पर की इस टिप्पणी में ऐसा क्या था जो इसे रोक रखा गया है?
http://murakhkagyan.blogspot.com/2010/01/blog-post.html