Monday, January 11, 2010

लोग छाती पीट कर कहते हैं कि "मेरे चिट्ठे पर मैं कुछ भी करूँ तुम्हारा क्या जाता है"

- Shashtri

मैं यह कहना भूल गया था कि जो लोग छाती पीट कर कहते हैं कि "मेरे चिट्ठे पर मैं कुछ भी करूँ तुम्हारा क्या जाता है" वे यह भूल जाते हैं कि पाठक भी कुछ कहना चाहता है और वह है:

"भाड में जाओ तुम और तुम्हारा 'व्यक्तिगत़' चिट्ठा. यदि तुम पाठकों की इज्जत करना नहीं जानते तो तुम को किस तरह के पाठक मिलेंगे यह हमें मालूम है".

-Shashtri


संदर्भ: महाजाल पर सुरेश चिपलूनकर
लिंक: http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2008/11/comment-moderation-and-word.html?showComment=1226406300000#c431941651720810052

3 comments:

rajiv said...

lekin apne ghar se doosare ke ghar dhela fenkenge ya kuch kahenge to padosi bhi chillayegab..

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

भाई चिट्ठा वजनदार है।
पर ये वर्डवेरीफिकेशन तो हटाओ।

Suman said...

nice