Friday, November 26, 2010

रचना आज तक न किसी की हुई है न ही होने वाली है


-अलबेला खत्री

हमारी भूल ये है कि हम रचना के पीछे दौड़ते हैं, रचना को अपना बनाना चाहते हैं ये जानते हुए भी कि ये रचना आज तक न किसी एक की हुई है और न ही आगे भी होने वाली है

- अलबेला खत्री

सन्दर्भ: धर्म और अध्यात्म के आलोक स्तम्भ
लिंक: http://khatrialbela.blogspot.com/2010/11/blog-post_24.html

Friday, May 14, 2010

हिन्दी ब्लॉगरी को बढ़ावा देने समीरलाल का अभियानात्मक प्रवचन मुझे पसन्द नहीं आया

-ज्ञानदत्त पाण्डेय

हिन्दी सेवा का भ्रम नहीं पालना चाहता समीरलाल के बरगलाने से...सत्यनारायण की कथा का कण्टेण्ट आज तक पता चल पाया..इन कथाओं को सुनने जाने वाले अपनी छुद्र पंचायतगिरी में मशगूल रहते हैं...बड़ी थू-थू में-में हो रही हिन्दी ब्लॉगरी में... व्यक्तिगत आक्षेप ब्लॉग साहित्य का अंग बन गया...मैं तो हिन्दी सेवा की चक्करबाजी में नहीं पड़ता/लिखता...बहुत प्रसन्नता होगी जब लोग हिन्दी ब्लॉगरी को गुटबाजी, चिरकुटत्व, कोंडकेत्व आदि से मुक्त करने के लिये टिप्पणी-अभियान करें...सड़क किनारे के सार्वजनिक मूत्रालय सा...लोग अपनी दमित वर्जनायें रिलीज कर रहे हैं और कोई मुन्सीपाल्टी नहीं जो सफाई करे मूत्रालय की...

-ज्ञानदत्त पाण्डेय

संदर्भ: मानसिक हलचल
लिंक: http://halchal.gyandutt.com/2010/01/blog-post_03.html

Thursday, May 13, 2010

अनूप जी और ज्ञानदत्त जी.. दबे हुए संस्कार ऐसे ही बाहर निकल आते हैं



हिंदी ब्लॉगिंग पर नजर रखने वाले जानते हैं ... ब्‍लॉगजगत के हर तकलीफ देने वाले तर्क वैध नहीं हैं ... गोले बनाने के कारखाने के इन बड़े अफसर की पुलक ... 'मौज' लेने के लिए राजी यार इकट्ठे करो और फिर मजा चखाएंगे ... बुजुर्ग ज्ञानदत्‍त-- 'संभाल अपनी औरत को नहीं तो ...

संदर्भ: आँख की किरकिरी
लिंक: http://vadsamvad.blogspot.com/2007/08/blog-post_10.html